मेरी गली से जब गुजरो,
मुस्कानों की बारिश किया करो।
याद रहे मुझे भी, तुम दूर हो इसलिए,
थोड़ा शर्मा के पलके झुका के, मीठी- मीठी बातें किया � read more >>
हे ! मज़हबी मानव तेरे कितने रूप और रंग
हम समझ ना पाए तेरे जीवन जीने का ढंग ।
आतंक दंगे-फसाद धर्म की आड़ में आखिर अभी कितने,
न जाने इस आग की � read more >>