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अरे! कौन आया है हरियाली की चादर ओढ़े टीसू रंग में रंगे अधर महक वादियों के खुशबू से जो तन मन में आ रही उतर, पीले सरसो के कुमकुम से सजी अ read more >>
कविता रघुवीर सिंह पंवार धूप में तपता, धरती का लाल, हाथ में हल, आँखों में सवाल। हर बूँद पसीने की, बनती मोती, खेती करता, सजाता अपनी ओटी। � read more >>
बारिश की बूंदों को देख, मन कितना आनंदित हो जाता हैं l और उन बूंदों में मन , ये भीगने को चाहता हैं l रोक नहीं पाती हूँ मैं ख़ुद को , जब बार� read more >>
अपना बना के तो देखो। दिल दे के तो देखो। नजरें मिला के तो देखो। मेरी सूरत तेरे आईना में, नज़र आएगी। अपना बना के तो देखो। सपना स� read more >>
थमा न थमेगा, ऊंट, झूठ का चक्का। मौका़ मिलने पर दोनों, लंबा मारते छक्का। ऊंट, झूठ अंत में, दोनों भागते मक्का। पकड़ा पथ छोड़े नहीं, कच� read more >>
मानसून घनघोर गर्जन करते हुए, मोतियों की झालरों से सजे हुए, बादलों के मतवाले सवारी पर सवार, नभ में विद्युत की जगमगाहट के साथ, छ� read more >>
तुम चाहो तो कर सकते हो लक्ष्य....जो तुमने ठना हैं गमला तोड़ निकलना होगा यदि पेड़ बनाकर तुम्हें दिखाना हैं माना ये आसान नहीं है नामुम read more >>
*कविता* *जाना खाली हाथ* मुठ्ठी बांध कर आये हैं जाना खाली हाथ संग नहीं कुछ जाएगा छूट जाएगा साथ। जिंदगी भर हम सब यहां करते हैं खूब read more >>
प्रीति_प्रीति प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन � read more >>
संसार की दुश्चिंताओं को क्यों तोड़ रही आशाओं को खुल कर जीने का दंभ है मेरा फिर अकुलाहट क्यों बाधाओं को। ये समर मेरा अपना है रूक कर क� read more >>
यह दुनिया, है भ्रम का टपरा। वरना मनुज, है मिट्टी का कमरा। भ्रम ही तो है, जिस पर टिकी है धरा। भ्रम का ही खेल है, पर-परा। तेरा, मेरा, सबक� read more >>
Mere jivan me for se eak tufan aya Chhin kar khusiyo ko dukhe ka bhandar laya Kya kusur tha mera jo dero musibte eak sath laya Sok the mere unhe pura karne ka junun tha Khusi ya thi sari jivan me sukun tha read more >>
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