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मस्त रहें
मित्रों मस्त रहें _ व्यस्त रहें _ स्वस्थ्य रहें । बरसात के इस मौसम में जरा खास ध्यान रखने की जरूरत होगी। समय के साथ जो तालमेल मिला
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पण्डित तथा नाई
(एक हास्य कहानी) बहुत पहले की बात है। एक गांव में एक परिवार के यहां सत्य नारायण पूजा का आयोजन रखा गया था। रात में पूजा होनी थी। दूर के दू�
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छमाछम बारिश
छमाछम बारिश छमाछम बारिश आ रही है, हरियाली ही हरियाली छा रही है। सारे जीव आनन्द ले रहें हैं, नजारा बहुत ही अद्भुत लग रहा है। मानो एक नव�
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मोहब्बत
मोहब्बत से चलती है दुनिया। फिर सजती है मानव की गछिया। दौलत से नहीं ताकत से नहीं _ आपसी मेल से चलती दुनिया।l (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार
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हम चार सहेलियां
हम सहेलियां हैं चार हमें नहीं है किसी का डर आपस में है प्रेम की एक डोर साहस भी है हम में अपार।। जब भावनाएं करती हैं अनेकों प्रहार कभी �
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बेटी सिया समान
सरसी छंद मुक्तक मातु पिता तब धन्य लगे जब ,बेटी सिया समान l सदा निभा पति धर्म चले जो,बनती पति की आन l बने अमर इस भव्य जहां में,लेती ना
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पापा आप स्मार्ट हो गये हो
आधुनिक जीवन शैली में पापा आप भी ढ़ल गये हो पापा आप चेंज हो गये हो पापा आप स्मार्ट हो गये हो ।। आप साईकिल में चलते थे फोर व्हीलर अब चला �
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रात सा अपना नाम
कहते थे कि अपने नाम का असर अपने जीवन पर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना अंधेरे में खोना नहीं अपना हुनर अंधेरे से ही पूरा होता �
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रात्रि हो निशा हो
कहते थे कि अपने नाम का असर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना खो नहीं देना यू ही अपना हूनर अंधेरे सा अपना जीवन न कर लेना।। तुम ऊष
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लिखना आज है जाना
बरसों पहले यही सोचती थी कि लोग कैसे इतना गहरा सोचते है कैसे लिख लेते है सागर जैसे अल्फ़ाज़ आज आप ही लिख रही हूं ।। तब जाना है कलम की इ�
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स्वयं को पहचान
क्या खोया क्या है पाया जमाने ने यही गिनवाया आते हैं सब लोग अकेले ही फिर भीड़ में चलना क्यों सिखाया।। अपनी पहचान अपना अस्तित्व मिटे �
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इस जीवन की कहानी
मन मे है विश्वास असंख्य जीवन का सार है संख्य मानव के दिल की जुबानी कुछ यादें मीठी,कुछ है पुरानी इस जीवन की यही कहानी।। कहते है कि आं�
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