(मुक्तक छंद)
01
जिन्दगी को मैंने इस कदर देखा जिन्दगी मुझ में डूब गई।
मेरी हर चाहत को पूरा करने के लिए मुझ में डूब गई।
अब आलम यह है कि सारी read more >>
सावन आया बादल छाए,
धरती पर खुशहाली लाये /
हरियाली की चादर ओढे,
पौधों ने अब ली अंगड़ाई /
बागों में अब झूले पड़ गए,
खेतों में अब मोर नाचे /
� read more >>
1.
मिट्टी की खुशबू में मेरा हिंदुस्तान बसता है,
तिरंगा लहराए तो दिल गर्व से हँसता है।
2.
सीमा पर जो जागते हैं, हम चैन से सोते हैं,
उन वीर ज read more >>
ठुकरा दिया उसने,
जो कभी पाने के लिए
मुझे तरस जाता था...
वक्त के साथ आज ये समझ आया,
जिसे मैं प्यार समझ बैठी थी,
वो प्यार नहीं,
बस एक ज़िद थी � read more >>
हवा के साथ जो उड़ती है वो धूल होती है,
मगर जो रूह को ज़ख्मी करे वो भूल होती है।
किसी के अक्स को पल भर में राख करती है,
ये अफवाह है साहब, जो ज read more >>